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अबुआ आवास योजना - आवेदन, इंस्टॉलमेंट, योग्यता

July 23, 2026
9 min read

अबुआ आवास योजना क्या है

अबुआ आवास योजना (AAY) झारखंड सरकार की अपनी आवास योजना है, जिसे ग्रामीण विकास विभाग चलाता है। "अबुआ" का मतलब स्थानीय बोली में "अपना" होता है। इसकी घोषणा अगस्त 2023 में हुई और नवंबर 2023 में यह शुरू हुई। पहली किश्त जनवरी 2024 में जारी की गई थी।

यह योजना खास तौर पर उन परिवारों के लिए बनी है जो कच्चे मकान में रहते हैं या बेघर हैं, लेकिन किसी वजह से केंद्र की प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं ले पाए। सबसे बड़ा फर्क घर के आकार का है। PM आवास में दो कमरे का घर बनता है, जबकि अबुआ आवास में कम से कम 31 वर्ग मीटर में तीन कमरे, रसोई और शौचालय वाला घर बनता है।

चलाने वाला विभाग ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार
फंडिंग 100% राज्य सरकार, इसमें केंद्र का हिस्सा नहीं है
कुल लक्ष्य लगभग 8 लाख आवास, तीन चरणों में
कुल बजट लगभग ₹16,320 करोड़
ऑफिशियल पोर्टल aay.jharkhand.gov.in

क्या क्या मिलता है

इस योजना में सिर्फ पैसा नहीं मिलता, कुछ और चीजें भी साथ जुड़ी हुई हैं। नीचे पूरा पैकेज देखें।

₹2 लाख

निर्माण सहायता

घर बनाने के लिए कुल दो लाख रुपये, जो किश्तों में सीधे आधार से लिंक बैंक खाते में DBT के जरिए आते हैं।

31 m²

तीन कमरे का घर

कम से कम 31 वर्ग मीटर में तीन कमरे और एक रसोई घर। स्थानीय सामग्री और डिजाइन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

95 दिन

मजदूरी

MGNREGA के तहत 95 दिन की अकुशल मजदूरी अलग से मिलती है, यह दो लाख का हिस्सा नहीं है।

₹12,000

शौचालय

स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने के लिए अलग से सहायता, यह भी दो लाख से बाहर है।

घर महिला के नाम पर होगा। योजना के नियम के मुताबिक आवास परिवार की महिला के नाम पर दर्ज किया जाता है। अगर परिवार में कोई वयस्क महिला नहीं है, तभी घर परिवार के मुखिया के नाम पर दर्ज हो सकता है।

पात्रता और शर्तें

पात्रता की मुख्य शर्तें सीधी हैं, और इनका फैसला सर्वे और ग्राम सभा के वेरिफिकेशन से होता है।

परिवार झारखंड का स्थायी निवासी हो
परिवार बेघर हो, या कच्चे, अर्ध पक्के या जर्जर मकान में रह रहा हो
परिवार ने PM आवास योजना या किसी और सरकारी आवास योजना का लाभ पहले न लिया हो
आधार कार्ड हो और वह चालू बैंक खाते से लिंक हो
घर बनाने के लिए अपनी जमीन या वैध कब्जे वाली जमीन हो

इसके अलावा कुछ श्रेणियों को चयन में प्राथमिकता दी जाती है:

PVTG परिवार

विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के परिवारों को पहले रखा जाता है।

आपदा प्रभावित

प्राकृतिक आपदा में घर गंवाने वाले परिवारों को प्राथमिकता मिलती है।

मुक्त बंधुआ मजदूर

बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए परिवारों को भी सूची में ऊपर रखा जाता है।

कौन पात्र नहीं है

कुछ स्थितियों में आवेदन खारिज हो जाता है। सर्वे और वेरिफिकेशन के समय यह बातें जांची जाती हैं।

परिवार पहले से PM आवास ग्रामीण या शहरी का लाभ ले चुका है
परिवार के पास पहले से पक्का मकान है
परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है
परिवार आयकर या व्यावसायिक कर देता है
परिवार झारखंड के बाहर का निवासी है

अपात्रता की सूची समय समय पर विभाग की गाइडलाइन से बदल सकती है। अपने मामले की पुष्टि पंचायत सचिव या ब्लॉक ऑफिस से कर लें।

किश्त कैसे और कब मिलती है

दो लाख रुपये एक साथ नहीं आते। यह राशि निर्माण की प्रगति के साथ किश्तों में जारी होती है, और हर किश्त से पहले उस स्टेज की जियो टैग फोटो पोर्टल पर अपलोड होना जरूरी है। आमतौर पर किश्तों का ढांचा इस तरह रहा है:

किश्त निर्माण की स्टेज राशि
पहली प्लिंथ या नींव का काम ₹30,000
दूसरी लिंटल यानी दरवाजे खिड़की की ऊंचाई तक ₹50,000
तीसरी छत की ढलाई ₹1,00,000
चौथी फिनिशिंग और घर पूरा होने पर ₹20,000

किश्तों का बंटवारा हर चरण में एक जैसा नहीं रहा है। कुछ चरणों में यही दो लाख पांच किश्तों में बांटा गया है। आपके मामले में कितनी किश्तें और कितनी राशि तय है, इसकी पुष्टि सिर्फ अपने स्वीकृति पत्र यानी सैंक्शन ऑर्डर से करें, किसी वेबसाइट या एजेंट की बात से नहीं।

किश्त रुकने की सबसे आम वजह जियो टैग फोटो का अपलोड न होना है। दूसरी बड़ी वजह बैंक खाते का आधार से सीड न होना है, क्योंकि DBT का पैसा उसी रास्ते आता है। खाते में पैसा न आए तो पहले बैंक से यह पुष्टि करें, फिर पंचायत सचिव या ब्लॉक ऑफिस से बात करें।

जरूरी दस्तावेज

फॉर्म भरने से पहले यह दस्तावेज तैयार रखें, इससे कैंप में काम एक ही बार में हो जाता है।

परिवार के सभी सदस्यों का आधार कार्ड
झारखंड का निवास प्रमाण पत्र यानी डोमिसाइल
आधार से लिंक बैंक खाते की पासबुक की कॉपी
राशन कार्ड, अगर बना हुआ है
जमीन के कागज या वैध कब्जे का प्रमाण
जाति प्रमाण पत्र, अगर आरक्षित श्रेणी में हैं
मौजूदा कच्चे घर की तस्वीर
मोबाइल नंबर, जो आधार से रजिस्टर्ड हो

आवेदन कैसे करें

यहां सबसे बड़ी गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए। इंटरनेट पर "Abua Awas Yojana online apply" बहुत सर्च होता है, लेकिन आम नागरिक इस योजना में पोर्टल से खुद ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकता। आवेदन ऑफलाइन होता है, "आपकी सरकार, आपके द्वार" कैंप, ग्राम पंचायत या ब्लॉक ऑफिस के जरिए।

1

अपने पंचायत का कैंप या ब्लॉक ऑफिस पता करें

कैंप की तारीख पंचायत भवन में या ब्लॉक ऑफिस से पता चल जाती है। पंचायत सचिव या रोजगार सेवक से भी पूछा जा सकता है।

2

आवेदन फॉर्म लें

फॉर्म कैंप या पंचायत भवन में मुफ्त मिलता है। इसकी PDF aay.jharkhand.gov.in से डाउनलोड करके प्रिंट भी करवाई जा सकती है।

3

फॉर्म ध्यान से भरें

नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर और परिवार की जानकारी वैसी ही भरें जैसी दस्तावेजों में है। स्पेलिंग का फर्क आगे दिक्कत करता है।

4

दस्तावेज लगाकर जमा करें

सभी जरूरी कागजों की फोटोकॉपी लगाकर फॉर्म कैंप के अधिकारी को जमा करें।

5

रसीद यानी acknowledgement लें

जमा करने पर एक रसीद नंबर मिलता है। स्टेटस चेक करने के लिए यही नंबर काम आएगा, इसे संभालकर रखें।

फॉर्म जमा होने के बाद सर्वे और ग्राम सभा में वेरिफिकेशन होता है। वहां से मंजूरी मिलने पर नाम लाभार्थी सूची में जुड़ता है, और उसके बाद सैंक्शन और पहली किश्त की प्रक्रिया शुरू होती है।

ऑनलाइन आवेदन के नाम पर पैसे न दें। फॉर्म, जमा करना और वेरिफिकेशन, तीनों मुफ्त हैं। कोई वेबसाइट या व्यक्ति "अबुआ आवास ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन" के नाम पर पैसे या आधार OTP मांगे तो वह फर्जी है। शिकायत सीधे ब्लॉक विकास पदाधिकारी (BDO) से करें।

लिस्ट और स्टेटस चेक करें

आवेदन के बाद दो अलग चीजें चेक की जा सकती हैं। पहली, आपका आवेदन किस स्टेज पर है। दूसरी, आपकी पंचायत की लाभार्थी सूची में नाम आया या नहीं।

आवेदन का स्टेटस

• "आपकी सरकार, आपके द्वार" पोर्टल खोलें

• Track Application विकल्प चुनें

• रसीद यानी acknowledgement नंबर डालें

• रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर सबमिट करें

लाभार्थी सूची

• aay.jharkhand.gov.in खोलें

• MIS Report सेक्शन में जाएं

• वित्तीय वर्ष, जिला, ब्लॉक और पंचायत चुनें

• कैप्चा भरकर सूची खोलें और नाम खोजें

MIS Report में जिलेवार पात्र और अपात्र आवेदनों की संख्या भी दिखती है। नाम न मिले तो इसका मतलब हमेशा रिजेक्शन नहीं होता, कई बार वेरिफिकेशन बाकी होता है। कुछ हफ्ते बाद दोबारा चेक करें, और फिर भी नाम न दिखे तो पंचायत सचिव या ब्लॉक ऑफिस से फाइल की स्थिति पूछें।

PM Awas Yojana से फर्क

दोनों योजनाएं आवास के लिए ही हैं, लेकिन इन्हें चलाने वाली सरकार, राशि और घर का आकार अलग है। एक ही परिवार दोनों का लाभ नहीं ले सकता।

अबुआ आवास योजना

• झारखंड सरकार की योजना, 100% राज्य फंड

• पोर्टल: aay.jharkhand.gov.in

• ₹2 लाख सहायता

• तीन कमरे, रसोई और शौचालय, कम से कम 31 वर्ग मीटर

• आवेदन कैंप, पंचायत या ब्लॉक ऑफिस से

• MGNREGA के तहत 95 दिन की मजदूरी

PM Awas Yojana Gramin

• केंद्र सरकार की योजना, केंद्र और राज्य का साझा फंड

• पोर्टल: pmayg.dord.gov.in

• ₹1.20 लाख, पहाड़ी और IAP जिलों में ₹1.30 लाख

• दो कमरे का घर, कम से कम 25 वर्ग मीटर

• रजिस्ट्रेशन AwaasPlus सर्वे से

• MGNREGA के तहत 90 से 95 दिन की मजदूरी

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या अबुआ आवास योजना में ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है?
नहीं। आम नागरिक aay.jharkhand.gov.in पर जाकर खुद आवेदन फॉर्म सबमिट नहीं कर सकते। आवेदन "आपकी सरकार, आपके द्वार" कैंप, ग्राम पंचायत या ब्लॉक ऑफिस में ऑफलाइन जमा होता है। पोर्टल सिर्फ फॉर्म डाउनलोड करने, स्टेटस देखने और लिस्ट चेक करने के लिए है।
PM आवास योजना का लाभ ले चुके हैं, क्या अबुआ आवास भी मिलेगा?
नहीं। यह योजना खास तौर पर उन्हीं परिवारों के लिए है जो PM आवास योजना से छूट गए हैं। एक ही परिवार दोनों योजनाओं का लाभ नहीं ले सकता।
क्या यह योजना शहरी क्षेत्रों में भी लागू है?
योजना का मुख्य फोकस ग्रामीण क्षेत्रों पर है और इसे ग्रामीण विकास विभाग चलाता है। शहरी क्षेत्र में लागू होने को लेकर जानकारी अलग अलग जगह अलग मिलती है, इसलिए अपने क्षेत्र की स्थिति नगर निकाय या ब्लॉक ऑफिस से पक्की करें।
जमीन नहीं है, फिर भी आवेदन कर सकते हैं?
घर बनाने के लिए अपनी या वैध कब्जे वाली जमीन का होना जरूरी है। जमीन न होने पर पहले अपनी स्थिति ग्राम पंचायत में दर्ज करवाएं, क्योंकि भूमिहीन परिवारों के लिए राज्य में अलग प्रावधान समय समय पर आते रहते हैं।
नाम लिस्ट में आ गया, पर पहली किश्त नहीं आई, क्या करें?
पहले बैंक से पुष्टि करें कि खाता आधार से सीड यानी NPCI मैप्ड है, क्योंकि DBT का पैसा उसी रास्ते आता है। इसके बाद पंचायत सचिव या ब्लॉक ऑफिस से पूछें कि सैंक्शन ऑर्डर जारी हुआ है या नहीं। जवाब न मिले तो BDO को लिखित शिकायत दें।
दो लाख में तीन कमरे का घर पूरा नहीं बन पा रहा है, क्या और पैसा मिलेगा?
योजना में तय राशि दो लाख ही है, इससे अलग अतिरिक्त राशि का प्रावधान नहीं है। MGNREGA की 95 दिन की मजदूरी और शौचालय की अलग सहायता जरूर ली जा सकती है, इसके लिए अपने जॉब कार्ड और पंचायत के रिकॉर्ड की जांच करवाएं।
घर किसके नाम पर रजिस्टर होता है?
नियम के मुताबिक आवास परिवार की महिला के नाम पर दर्ज किया जाता है। परिवार में कोई वयस्क महिला न होने की स्थिति में ही घर परिवार के मुखिया के नाम पर दर्ज हो सकता है।

अपना स्टेटस या लिस्ट देखें

ऑफिशियल पोर्टल से पंचायत की लाभार्थी सूची और आवेदन की स्थिति चेक करें। पूरी प्रक्रिया मुफ्त है।